Saturday, May 22, 2010

पुत्रियाँ घर की लक्ष्मी होती हैं.......सदैव लक्ष्मी निवास.......

बहुत भाग्यशाली होते हैं वो लोग जिनके घर में लक्ष्मी रूपेण पुत्री जन्म लेती हैं , अपने पिता के व्यक्तित्व के निर्माण में पुत्री का बहुत बड़ा सहयोग होता हैं. पुत्री जिस दिन घर से विदा होती हैं अपने ससुराल के लिये उस दिन को याद करके कोई भी पिता  का रोम रोम सिहर उठता हैं किसी भी पिता का , पुत्री का महत्व उस दिन पिता को चलता हैं , जिस दिन पुत्री अपने पिता के लिये छोड़ कर जाती हैं बिदाई के आँसू  की वह धारा जिसको रोकते रोकते अच्छा खाशा समय निकल जाता हैं ......
इस लिये जब तक घर में पुत्री हैं , उनसे हरेक पिता को प्यार ही प्यार करते रहना चाहिए , मुर्ख होते हैं वो लोग जो बेटी को पराई धन समझते हैं .....पुत्री सदैव अपने पिता के प्रेम में अपना प्राण दिये रहती हैं ..... और दूसरी तरफ बहुत सारे पुत्र अपने पिता के अंतिम दिन का इन्तजार करते हैं ताकि पिता की धन बटोर कर अयिआशी कर सके .....
भारतीय परिवारों में मां को परिवार की धुरी और पिता को स्तंभ कहा जाता है। वह स्तंभ जो कठिन परस्थितियो में भी कमजोर न पड़े और परिवार को अपने मजबूत कंधों पर संभाल कर रखे !इस संसार के कोई भी व्यक्ति अगर ,राज्य, सत्ता, सृष्टि, उच्च स्थान, शक्ति, पवित्र तेज, आवास, धन-वैभव और सौंदर्य पाना चाहते हैं तो अपने कोमल हर्दय से लक्ष्मी रूपेण पुत्रियों को प्यार करे .
जीवन में मित्रवत व्यवहार, अपने पुत्री के साथ करके उन्हें सफलताआयों के आसमान प़र पहुचाने में पिता का बहुत ही बड़ा योगदान होता हैं !सार्वजनिक जीवन में भी ऐसे कई उदाहरण देखने को मिल जाते हैं,जहां पिता ने बच्चों के साथ अनुशासन और मित्रता का संयोजन बिठाया और अपने बच्चों को सफलताओं की ऊंचाइयों पर पहुंचाया। देश के पहले प्रधानमंत्री ने भी अपनी पुत्री के लिए आदर्श पिता की भूमिका बखूबी निभाई। जेल में रहते हुए जवाहर लाल नेहरू ने अपनी लाड़ली इंदिरा को पत्र लिख कर जीवन की दिशा दिखाई। इसलिए पिता को अपने बच्चो के साथ एक दोस्त की भूमिका में ही रहनी चाहिए | बच्चों को सिर्फ अनुशासन के दम पर बेहतर नागरिक नहीं बनाया जा सकता,इसके लिए उनका मित्र बनना भी जरूरी है। अच्छी बात यह है कि पिता की इस  भूमिका का समाज में स्वागत हो रहा है और इसकी स्वीकार्यता बढ रही है।
घर की पत्नी भी लक्ष्मी रूप होती है। जिस प्रकार हम माँ लक्ष्मी की पूजा-अर्चना, प्रसन्न करने हेतु अनेकानेक उपाय करते हैं तो घर की लक्ष्मी को क्यों नहीं सम्मान देते। जो घर की लक्ष्मी को सम्मान देता है उसके घर में लक्ष्मी सदा निवास करती है। लक्ष्मीजी को भगवान विष्णु की पत्नी माना जाता है। 'शतपथ ब्राह्मण' ग्रंथ में लक्ष्मीजी के बारे में एक कथा है कि प्रजापति ने लक्ष्मी की रचना की, लक्ष्मी का जन्म अत्यंत रूपवती और गुणवती देवी के रूप में हुआ।
"या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरुपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः "
सुख-वैभव अगर प्राप्त करना चाहते हैं तो सदैव इन मंत्रो का जाप करे , अपने घर में ही कहीं बाहर जाने कि  जरूरत भी नहीं हैं !
नमस्तेऽस्तु महामाये श्री पीठे सूरपूजिते।

शंखचक्र गदाहस्ते महालक्ष्मी नमोऽस्तुते।।
नमस्ते गरूड़ारूढ़े कोलासुर भयंकरि।
सर्व पापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तुते।।
महामाया सर्व विघ्‍न हरण करने वाली माँ लक्ष्मी को प्रणाम है, हे‍ देवी, जिनके पूजन को सुर, नर, देव किन्नर आदि अनादि काल से करते चले आ रहे हैं। जिनके हाथ में शंख, चक्र, गदा और पद्म है, जो समस्त पापों का नाश करती है , ऐसी महालक्ष्मी देवी को मेरा प्रणाम है।
शीर्ष देवी माँ लक्ष्मी का पूजन करने के लिए पति-पत्नी दोनों को साफ एवं पवित्र मन रखना चाहिए, तब ही देवी प्रसन्न होती हैं। हृदय में उल्लास एवं मन में प्रसन्नता रखें, सारे घर के क्लेश खत्म कर दें। नित्य कर्म के पश्चात अपने से बड़ों के पैर छुएँ, उनसे आशीर्वाद लेकर फिर अपने इष्ट एवं कुल देवी देवता का पूजन करें।
जिस घर में शुद्धता, पवित्रता रहती है और बिना सूँघे पुष्प देवताओं को चढ़ाए जाते हैं, उस घर में लक्ष्मी नित्य विचरण करती है, जिस घर में स्त्रियों का सम्मान होता है स्त्री पति का सम्मान और पति के अनुकूल व्यवहार करती है एवं पतिव्रता और धीरे चलने वाली स्त्री के घर में लक्ष्मी का निवास रहता है।
एक गाना हैं जो कि मेरे लिए बहुत ही प्यारा हैं , जिसको इतना गाता हूँ , फिर भी मन नहीं भरता हैं.....अपनी प्यारी बिटिया के लिए ही गाता हूँ और गाता रहूँगा !!!!!......आमोद कुमार,

रोते रोते हसना सीखो , हँसते हँसते रोना
जितनी चाबी भरी राम ने , उतना चले खिलौना
हम दो एक हमारी , प्यारी प्यारी मुनिया हैं
बस यही छोटी सी अपनी सारी दुनिया हैं
खुशियों से आबाद हैं , अपने घर का कोना कोना
बड़ी बड़ी खुशियाँ है , छोटी छोटी बातों में
नन्हे मुन्ने तारे जैसे , लंबी रातों में
ऐसा सुन्दर हैं ये जीवन जैसे कोइ सपन सलोना
मौसम बदले तो मत डर जाना , गुडीयाँ रानी
सावन में बिजली चमकेगी , बरसेगा पानी
धरती अंबर भीग जाए , नैनों को नहीं भिगोना .......
 पाटलिपुत्र , बिहार , हिंदुस्तान

5 comments:

Anonymous said...

Howdy! Someone in my Facebook group shared this website with
us so I came to check it out. I'm definitely enjoying the information. I'm bookmarking
and will be tweeting this to my followers! Superb blog and outstanding style and design.

My website ... RegeniaCLotts

Anonymous said...

I must thank you for the efforts you've put in penning this
website. I really hope to view the same high-grade content by you
later on as well. In fact, your creative writing abilities has encouraged
me to get my own blog now ;)

Also visit my site ... TristanDTrad

Anonymous said...

Hi there, just wanted to tell you, I enjoyed this post.
It was funny. Keep on posting!

my site; MadisonEDirkson

Anonymous said...

Simply wish to say your article is as astonishing.

The clearness to your submit is simply spectacular and i could assume you're
knowledgeable on this subject. Well with your permission allow me
to take hold of your RSS feed to stay up to date with approaching post.
Thanks one million and please continue the enjoyable
work.

Feel free to visit my web blog ... PuraEHarmen

Anonymous said...

I every time spent my half an hour to read this web site's articles everyday
along with a mug of coffee.

My web site ... AlicaYEberst