Friday, May 7, 2010

प्रत्येक व्यक्ति का जीवन अहंकार मुक्त होना चाहिए।

07-05-2010
तेरे जैसा यार कहाँ ,कहाँ ऐसा याराना

जीवन अहंकार मुक्त होना चाहिए। यह मुझे अच्छी तरह से मालूम हैं !और अहंकार मुक्त होकर ही रहता हैं,और मेरे पास हैं ही क्या जो अहंकार करूंगा  ?
अहंकार किसी भी व्यक्ति को निम्न स्तर के चिन्तन और कार्यो की ओर आकर्षित करता है। कर्म मानव जीवन के दो ऎसे अभिन्न पहलू हैं जिन्हें एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता।
आत्मा की भाषा, ईश्वरीय परिकल्पना उसकी शब्दावली में नहीं हो सकती। हमारे यहां कहा जाता है कि इसका तो माथा भारी हो गया। थोडा विचार करें कि भारी क्या है शरीर भारी है, मन भारी है, विवेक भारी है— इसका अर्थ है व्यक्ति अहंकारी है। जीवन का सुख और आनन्द हल्केपन में है। शरीर को हल्का रखने की सलाह तो सभी देते हैं।
फोटो अपना खीचते हैं शान से इसमें बुराई क्या है ?
मैं बुरा कर्म न करूँगा, उसी के त्याग की मैंने बचपन से ही प्रतिज्ञा की है ! 
                     
हमेशा अच्छे शास्त्रों का अभ्यास, अच्छे पुरुषों का संसर्ग  करना और पवित्र वातावरण में रहना चाहता हूँ , ताकि तन मन की सुन्दरता हमेशा बनी रहे |  अच्छे व्यक्तियों की सेवा करने से तन की शुद्धता बनी रहती हैं , तन और मन की शुद्धता बनी रहे , इसलिये हमेशा अपना आचरण शुद्ध रखने का प्रयास करता हूँ , और सफल भी होता हूँ !

आमोद कुमार

पाटलिपुत्र , बिहार , हिंदुस्तान

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