लाठी एक बहुत ही चमत्कारिक हथियार हैं , जिससे अच्छे अच्छे पापियों को शुद्ध कर दिया जाता हैं ! अगर आप देश के अंदर के पापी को शुद्ध करना चाहते हैं , तो लाठी का प्रयोग करना सीखे .....AK47, AK-56 और मशीनगण का प्रयोग विश्व युद्ध में ही शोभा देती हैं , ना की देश के अन्दर पनपे छोटे मोटे अपराधियों के लिए !अपने देश के बुनियादी ढांचा सुधारने में लाठी का प्रयोग करना अति आवस्यक, परम्परागत हथियार हैं ! कैसे यह खेल खेला जाता हैं , अगर सीखना हैं , तो जाकर मिलीये श्री सी के अनिल जी से , बहुत ही साधारण व्यक्ति हैं , लेकिन लाठी का कैसे सदुपयोग किया जाता हैं , सभी को अच्छी तरह से सिखायेंगे !
एक समय की बात हैं , हिन्दुस्तान के सभी लोग अपनी नजरे टी वी और अखबार पर लगाये हुए थे, हम भी देखते थे कि आखिर इतना बड़ा विश्वयुद्ध अपने देश के अन्दर ही कैसे शुरू हो गया , लेकिन उस समय हँसते हँसते हम भी लोट पोट हो गये जब देखे कि एक साथ उत्तरप्रदेश और बिहार पुलिस के बहादुर जवान एक बहुत ही छोटे किस्म के अपराधी से मुठभेड़ करने में लगे हुए हैं , और लगातार दो दिनों तक अच्छी खाशी मात्रा में अपने कारतूस भी बर्बाद हो गया और परिणाम शुन्य आया |
एक समय ऐसा भी आया क़ि बिहार में किसी पार्टी के स्पष्ट बहुमत ना मिलने के कारण राष्टपति शासन हो गया , यहाँ प़र देखिये श्री सी के अनिल जी का कमाल , उन्होंने उस भयानक से साधारण युद्ध में अविजित रहे , लड़ाका लोगो को बहुत ही अच्छी तरह से लाठी का प्रयोग करने की प्रेरणा स्वम दी , और पुरे देश को करके भी दिखाया क़ि , यहाँ तो सिर्फ लाठी क़ि जरूरत थी क्योंकि जिसको आप बाहुबली समझते हैं ? वे तो एक लाठी की माड़ झेल ही नहीं पाएंगे , और आप लोग भीड़ गये थे देश के अत्याधुनिक हथियारों के साथ जिनका प्रयोग बाहरी सुरक्षा हेतु किया जाना हैं | कितना आप लोगो ने देश की सम्पति बर्बाद कर के रख दी , कभी इस प़र भी सोंच कर देखे ! चीन वाला से लड़ना होगा तब खूब काम आता ना |
लेकिन जैसे ही बिहार प्रदेश में नयी सरकार बनी तुरंत , शुरू हो गये अपने नाम का डंका पीटने के लिये और डंका पिट भी भी दिये अपने नाम की ! ...... तब तो मुझे भी लिखना ही पड़ेगा ना की " लड़े सिपाही और नाम हवालदार की" वाली बात पूर्ण रूपेण चरितार्थ !और यहाँ तो सिर्फ लाठी का कमाल हैं ! सचमुच बहुत ही उपयोगी वस्तु है लाठी .....
यहाँ कभी कभी ऐसा भी होता हैं की आदमी अपने आँख से कुत्ता को देखते हुए भी शेर समझने लगता हैं ! लेकिन यह तो अपनी अपनी नजरे हैं देखने की लेकिन आप लोग को भी जब कोई कुत्ता परेशान करे तो लाठी का प्रयोग करे फिर देखिय्र चमत्कार , तुरंत कुत्ता गायब !
एक छोटे से गिलास फूलदान में भाग्यशाली बांस, यह प्राचीन चीनी संस्कृति में प्रथागत है कि जीवन बांस का एक उपहार अच्छा भाग्य लाता है. हमारे घर में भी लोग खूब रखते हैं , लेकिन सुख जाता हैं ....हम हमेशा बोलते हैं भी हैं की क्यों पैसा बर्बाद करते हो चीन के बांस में ? अपने भारतवर्ष का बांस रखो , सदा सुखी रहोगी , लेकिन मेरा कोई नहीं सुनता हैं तो हम क्या करे , हम अपना अच्छा लाठी हमेशा रखे रहते हैं , क्योंकि मुझे मालूम हैं की हिन्दुस्तान के बांस सबसे भाग्यशाली बांस हैं सबो के लिये ! भाग्यशाली बांस रहेगा सदैव !
राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर जी ने लिखा हैं .......
सुनूँ क्या सिंधु मैं गर्जन तुम्हारा, स्वयं युगधर्म का हुँकार हूँ मैं
कठिन निर्घोष हूँ भीषण अशनि का, प्रलय गांडीव की टंकार हूँ मैं..
दबी सी आग हूँ भीषण क्षुधा की, दलित का मौन हाहाकार हूँ मैं
सजग संसार, तू जग को संभाले,व प्रलय का क्षुब्ध पारावार हूँ मैं.
थोड़ा पानी पी लेने दीजिये तब लिखेंगे ! डर के मारे मुह सुखा जा रहा हैं ....
आमोद कुमार पाटलिपुत्र , बिहार , हिंदुस्तान

6 comments:
ये अँधा कानून हैं !
भाग्यशाली बांस रहेगा सदैव ! GREAT SIR JEE
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