बचपन से सुनता आया हूँ कि गरजने वाले बादल कभी बरसते नहीं हैं
गरजने वाले बादल बरसते नहीं हैं सिर्फ गरज गरज कर अपना रोष दिखाते हैं भड़क भड़क कर,कड़क कड़क कर,बिजली ख़ूब गिराते हैं लेकिन विद्वान और बहादुर लोग कहाँ इसकी परवाह करते हैं |
बातों को उल्टा पुल्टा बताकर दूसरों को प्रभावित करने वाले लोग कायर होते हैं , हिम्मत हो तो सच बोलो सामने आकर हम भी आदर करेंगे |
रूद्रों को अग्नि-रूपी, वृष्टि करने वाले और गरजने वाले देवता भी कहा गया है। रूद्रों को अपार्य भी कहते हैं। भगवान शंकर का एक रूप भी रूद्र कहा गया है। कामदेव को भस्म और दक्ष का यज्ञ ध्वंस करते समय उन्होंने रौद्र रूप धारण किया था।शंकर की उपासना रूद्र या महाकाल के रूप में भी की जाती है।
पाप को पाप न समझने का पाप हम करते हैं और जिसे ‘समय के अनुसार जीना, हालात के मुताबिक सोच-समझकर चलना’ का नाम दे दिया गया है। परन्तु पाप तो पाप है। शैतान परमेश्वर के लोगों को विरोधी है और युद्ध जारी है। हमें जो मसीही हैं इससे लड़ना ही है। पाप को समूल नष्ट करना ही है।
पाप तुम्हारे मरनहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उसकी लालसाओं के आधीन रहो’’। पाप को नष्ट करना है लिखा है ‘‘इसलिये अपने उन अंगों को मार डालो जो पृथ्वी पर हैं अर्थात् व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्कामना, बुरी लालसा, और लोभ जो मूर्तिपूजा के बराबर है ...
पाप से, शैतान से लड़ते समय हमारा दृष्टिकोण, आक्रामक होना चाहिये न कि सुरक्षात्मक। आज पाप से लड़ते हुए सबसे बड़ी समस्या यह है कि शैतान पर हम नहीं वरन् शैतान हम पर हावी है; हम हो गये हैं डिफेन्सिव। आज हम बार-बार यह कहते हैं कि शैतान का शिकंजा बढ़ता जा रहा है और यह बढ़ता इसलिये जा रहा है क्योंकि हम सिमटते जा रहे हैं।
पाप, शैतान की बात करते हैं तो ऐसा लगता है मानो हम परमेश्वर से ज्यादा शैतान से डरने लगे हैं। पाप से लड़ने का आत्मविश्वास खो दिया है हमने। हम इस बात को प्रमुखता देते हैं कि तुम्हारा विरोधी शैतान गरजने वाले सिंह की नाईं इस खोज में रहता है कि किसको फाड़ खाए परन्तु ये भूल जाते हैं कि वह हमारा विरोधी है। विरोधी का प्रयास होता है नाश करना परन्तु विरोधी से भयभीत नहीं हुआ जाता, उससे लड़ा जाता है उसे हराने का प्रयास किया जाता है।
इसलिये आज हमें ये देखना है कि पाप और शैतान का हमारे प्रति कैसा रवैय्या है |
जय शैतान पर पाना है और जय लड़कर मिलती है। बिना लड़े मिलती है हार, समझौते से मिलती है संधि।
पाटलिपुत्र , बिहार , हिंदुस्तान
परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर, क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्तव्य यही है....
आमोद कुमार
पाटलिपुत्र , बिहार , हिंदुस्तान







2 comments:
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