Thursday, April 22, 2010

कैसे अपने आप को खुश रखे ?????

कैसे अपने आप को खुश रखे ?????
हमेशा सक्रिय रहिये !
अपने आप को सक्रिय रखें, हमारे मन रखने के लिए  निष्क्रिय और कई मामलों में अलगाव का उत्पादन किया जा रहा. रोमांचक गतिविधियों के लिए गाना गाये या सुने , खेल या अन्य चीजें हैं जो एक साधन या नृत्य के कुछ प्रकार के खेल की तरह रचनात्मकता की आवश्यकता होती है एक उत्कृष्ट खुशी बूस्टर है |
सामाजिक बनकर रहना सिखिये !
सामाजिक संपर्क हमेशा बनाये रखना है , आपके परिचित समूह और दोस्तों के साथ संपर्क में रहते हैं. यह हमेशा अधिक से अधिक एक अकेला सामाजिक परिवेश में संतुष्टिदायक.
आशावादी बने रहना हैं !
एक आशावादी सोच का तरीका विकसित करें.  इस तरह आप अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रख सकते हैं.
खुश रहना हैं, चिंता नहीं!
उन चीजों कि आप चिंता के बारे में भूल जाना हैं . समय या चीजें हैं जो अभी तक नहीं हुआ है या चीजें हैं जो कभी नहीं हो सकता करने के लिए ऊर्जा समर्पित नहीं करना हैं |
हंसते हुए बनाये रखना हैं !
हास्य की अपनी भावना का विकास करना, कुछ हास्य और हल्के ढंग से उस तरह से आपको हमेशा ख़ुशी महसूस होगी , स्थितियों के साथ लेकर चलना हैं |

मनुष्य का जीवन प्रकृति का सबसे बड़ा उपहार है 'अच्छे कर्मो का फल जरूर मिलेगा'  कर्म करना ही जीवन है। मनुष्य को अपने अनमोल जीवन में कर्म करते रहना चाहिए, फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए।

इसलिए हमें अच्छी आदतों का विकास लगातार करते रहना चाहिए।अच्छी आदतों के निर्माण में निश्छल सहयोगी बनें। इसी तरह अप्रसन्नता एक बुरी आदत के सिवाय कुछ भी नहीं है। जब आप रोज सुबह खिन्न मन से उठते हैं, तब आप आईने में चेहरा देखें और मुस्कुराएं। ऐसा करना उस क्षण मूर्खतापूर्ण जरूर लग सकता है, लेकिन यह तरीका आपकी खिन्नता दूर करने में सहायक सिद्ध होगा। दरअसल, ऐसा करने से कुछ समय बाद खुश रहना अपने आप आपकी आदत बन जाएगी और आप इसे धीरे-धीरे पूर्ण ख़ुशी भी महसूस करने लगेंगे।
संयम व संकल्प जरूरी

बुरी आदतों से छुटकारा पाने का सबसे बडा उपाय है संयम और संकल्प। जब आपमें विचारों को संयम-शक्ति के माध्यम से दिशा देने की क्षमता आ जाती है, तो आपको आसानी से इससे छुटकारा मिल सकता है। हो सकता है कि आपको सिगरेट पीने की आदत हो और आप इससे छुटकारा पाना चाहते हैं, तो पहले 90 दिनों के लिए संकल्प लें। यदि छुटकारा न मिले, तो फिर से 90 दिनों का संकल्प लें। इस तरह से आप देखेंगे कि धीरे-धीरे आपकी आदत छूट रही है। यदि किसी को अधिक क्रोध आता है, तो इसे दूर करने के लिए पहले दस दिनों का संकल्प लें। क्रोध को अपने वश में करने की कोशिश करें। जो भी आदतें आपको अपना कर्म करने से रोकती हैं, आपको कष्ट पहुंचाती हैं, उन्हें आप संकल्प व संयम से दूर भगा सकते हैं।  एक कहावत है,  चोर के साथ चोर ही रहता है। कहने का तात्पर्य यह है कि बुरी आदतों वाले लोगों से दूर ही रहें, तो बेहतर। बुरी आदतों को दूर भगाकर आप स्वयं अच्छी आदतों के मालिक बन जाएं। ऐसा कतई मुश्किल नहीं.., कदम बढाकर तो देखें।
आमोद कुमार

पाटलिपुत्र , बिहार , हिंदुस्तान

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