मानवता ही पहला धर्म है !!!!!!!
अपने को समर्पित कर देना अपने प्रियतम के लिए बिना अपने अस्तित्त्व की परवाह किये शून्य में विलीन हो जाना ही प्रेम है ! प्रेम के कई रूप है और हर रूप में समर्पण पहली और आवश्यक शर्त है. जहाँ समर्पण नहीं वहा प्रेम नहीं. प्रेम आत्मा की विषय वस्तु है मस्तिष्क की नहीं. इसके अहसास को लिखना, बताना गुगें व्यक्ति से मीठे का स्वाद पूछने जैसा है ! मीरा नहीं बता सकती कि उस जहर को क्यों पिया. महादेवी वर्मा नहीं बता सकती कि उन्होंने आजीवन अकेले क्यों रहना पसंद किया ! प्रेम में कोई बंधन नहीं कोई सीमा नहीं कोई उम्र नहीं यह तो जो अपने अंतर्भावो को जो समझ सके प्रेम उसी से हो जाता है चाहे वो शादी शुदा महिला का किसी युवक से ही क्यों न हो ! दो विपरीत लिंग के बीच पनपा प्रेम सदियों से चली आ रही तमाम सामाजिक वर्जनाओ, कुरितियो को पल भर में तोड़ देता है. जिन जाति, धर्म, छुआ छूत आदि बुराइयों से लड़ने के लिए महापुरुषों ने जीवन लगा दिया प्रेम में तो इनका कोई स्थान ही नहीं है. घोर शारीरिक कष्टों, यातनाए के बाद भी व्यक्ति को उसके प्रेम से अलग नहीं किया जा सकता आखिर वह कौन सा विचार होगा जिसने मृत्यु के भय को भी निकाल दिया. यह प्रेम ही था. जिसने भगत सिंह को शहीद भगत सिंह बना दिया. मानवता कि ओर बढ़ने के लिए प्रेम पहला कदम है ! शक, अविश्वास, अभिमान, छल, झूठ, इर्ष्या, राग, द्वेष, कपट, स्वार्थ, क्रोध जहाँ से खत्म होते है. प्रेम वही से शुरू होता है ! प्रेम वह नहीं कि धर्म के नाम पर हम किसी कि हत्या कर दे ! प्रेम तो सामने टेबल में रखा हुआ स्वादिष्ट मांस को हम सिर्फ इस वजह से न खा सके कि यह भी किसी जीव का है ! हमारा अंतरात्मा हमें कुछ भी गलत करने से रोक देगी उसके लिए किसी धर्म से जुड़ा होना और किसी सबूत कि जरूरत नहीं. हम स्वयं ही सही और गलत का फैसला कर लेंगे. उस दशा में मानवता ही मुख्य धर्म होगा ! आज प्रेम के आभाव में पूरा समाज तनाव के घेरे में है क्योकि हमारे अन्दर समर्पण का भाव नहीं रहा. जिम्मेदारियों से भागने लगे हम ! आज हर सम्बन्ध कि डोर कमजोर होती जा रही है. सुहागरात के दिन ही तलाक के बीज पड़ जाते है ! प्रेम होने के बाद उसे किसी I LOVE YOU जैसे शब्दों से बयां करने कि जरूरत नहीं वह तो खुद ही प्रदर्शित हो जायेगा. आग अगर अन्दर लगी हो बाहर खुद ब खुद आ जाएगी उसे कौन रोक सकता है भला ? परन्तु अफ़सोस युवा जिस प्रेम में पड़ कर अपने माता पिता तक को छोड़ देते है. उन्हें पता ही नहीं होता कि ये आकर्षण है देह का और आकर्षण चाहे किसी भी चीज का हो वह क्षणिक ही होता है ! क्या वजह है कि प्रेम विवाह सफल नहीं साबित होते ! पुरे लेख का उद्देश्य सिर्फ इनता है कि मानवता ही पहला धर्म है जब हम प्राणी मात्र से प्रेम करेंगे तो फिर उस दिन से काला गोरा हिन्दू - मुस्लिम का भेद ख़त्म हो जायेगा !.............. मुझे अपने हाथो से गले लगा लो यारो नहीं तो तुम्हारे यही हाथ किसी दिन भीड़ का रूप लेकर मेरी गर्दन न काट दे........................
.....आमोद कुमार , पाटलिपुत्र


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