Thursday, April 29, 2010

मर्द कभी आँसू नहीं बहाते हैं , बल्कि आँसू बहाने के बजाये उसका रास्ता ढूढ़ते हैं !

आँसू तो तेरे मोती हैं मुर्ख , व्यर्थ में मोती मत गिरा ,  आँसू ना बहा फ़रियाद ना कर , कोई नहीं सुनेगा , जाकर वक़्त का मुकाबला कर ! वह भी डट कर  !!!!!!
भगवान भी सत्य की राह पर चलने वालों के हमेशा साथ रहता है। अब कहते हैं न कि भगवान के घर में देर है, अँधेर नहीं। इसलिए भरोसा रखें कि जीवन संग्राम में आप भी सारे कष्टों से पार पाकर अंततः विजयी होंगे।
कुछ लोग असत्य की राह पर चलकर भी बड़े मजे में रहते हैं। वे दूसरों को कष्ट देकर, उनका हक मारकर ही जीते हैं। इनकी हरकतें ऐसी होती हैं कि उन्हें देखकर किसी की भी आँखों में खून उतर आए। लेकिन इन्हें दूसरों को खून के आँसू रुलाने में ही मजा आता है, क्योंकि इनकी आँखों का पानी जो सूख चुका होता है। अगर इनकी आँखों में आँसू नजर आएँ भी तो वे मगरमच्छ के आँसू ही होते हैं, जिनके सहारे ये लोगों की भावनाओं का फायदा उठाते हैं।
आप भी ऐसी ही प्रवृत्ति के हैं यानी आप भी वहीं कर रहे हैं जो कौरवों ने किया था, तो एक दिन आपका भी वही हश्र होगा जो कौरवों का हुआ। इसलिए बेहतर यही है कि जितनी जल्दी हो सके, सत्य की राह पकड़ लें और लोगों के आँसू पोंछने की कोशिश करें वर्ना जब आपके आँसू बहेंगे तो कोई उन्हें पोंछने नहीं आएगा।

'ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आँख में भर लो पानी' गणतंत्र दिवस के अवसर पर जब पहली बार लता मंगेशकर जी ने इन पंक्तियों को गाया था तो उसे सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आँखों से झर-झर आँसू बहने लगे थे। वाकई इन पंक्तियों में है ही इतनी शक्ति कि आज भी अच्छे-अच्छों की आँखों में पानी आ जाता है।
आज व्यक्ति धन-वैभव का अहंकार करता है, परंतु वह अंत में धराशायी हो जाता है। जिसके जीवन में विनय का गुण है, वह ज्ञान प्राप्त कर सकता है।यदि ज्ञान पाना है तो अहंकार का विसर्जन करना ही होगा।
बच्चों को यह प्रेरणा दे कि वे प्रतिदिन प्रातः अपने माता-पिता और गुरु के चरणों में वंदन अवश्य करें।
महिलाएँ पुरुष की अपेक्षा कम तनावग्रस्त रहती हैं। इसका मूल कारण यही है कि वे पुरुषों की भाँति भावनात्मक संवेगों को दबाती नहीं बल्कि आँसुओं के जरिए मन के भार को हल्का कर देती हैं।
स्वास्थ्य के लिए हँसना अभी तक लाभदायक माना जाता रहा है, किंतु नई खोजों के आधार पर यह सिद्ध हो चुका है कि रोना भी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। रोकर अनेक तरह के रोगों का उपचार किया जा सकता है।
पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियाँ रोकर अपनी आयु में वृद्धि कर लेती हैं, जबकि पुरुष अपने अहं के कारण रोना नहीं चाहते हैं और अनेक प्रकार के रोगों से घिरे रहते हैं। यदि पुरुष भी मानसिक आघातों से त्रस्त होने पर आँसू बहा दिया करें तो उनमें रक्तचाप एवं हृदय संबंधी रोगों में कमी आ सकती है। जोर से रोने पर मनुष्य के मस्तिष्क में दबी भावनाओं का तनाव दूर हो जाता है, जिससे काफी राहत महसूस होती है एवं शक्ति की भी अनुभूति होती है।
महिलाओं में रोने का गुण होने के कारण ही पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों को दिल के दौरे कम पड़ते हैं। स्त्रियाँ रोकर अपने दिल का बोझ हलका कर लेती हैं। अपने मानसिक तनावों को आँसुओं द्वारा कम न कर पाने के कारण पुरुष प्रायः धमनियों संबंधी शिकायतों से ग्रस्त रहते हैं।
आँसू के कारण ही आँखें नम रहती हैं। भावनात्मक आँसू अवसाद, उदासी एवं क्रोध को समाप्त करते हैं। रोने से मन का संपूर्ण मैल धूल जाता है। अतः जब कभी भी किसी कारण से रोना आए तो उसे रोकना नहीं चाहिए, बल्कि खुलकर बाहर आने देना चाहिए। अन्यथा आँखों में रुके हुए ये आँसू स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
हमें अपनी दोस्ती का सबूत देते हें यह आँसू........
माता जीवन का निर्माण करती है, तो पिता उसे उन्नति के शिखर तक ले जाता है। जो व्यक्ति अपनी माँ को प्रसन्न रखता है, वह उसके आशीर्वाद का वरदान भी पाता है। ऐसी परम उपकारी वात्सल्य मूर्ति माँ की आँखों में कभी आँसू नहीं आने देना। जो विनयपूर्वक परमात्मा और सद्गुरु के चरणों में समर्पित हो जाता है, वह सबकुछ पा जाता है।
माँ का फ़ोन कॉल हैं, बहुत तंग करती हैं , कुछ लिखने भी नहीं देती हैं !
आँसू मन का दर्पण होते हैं, जो न कहने पर भी बहुत कुछ कह जाते हैं, बहुत कुछ बता जाते हैं। चाहे तकिए में मुँह दबाकर निकालें या घर के कोने में बैठकर, अकेले में रोएँ या भीड़ के बीच आँसू बहाएँ, आँसू तो दुःखड़ा बयाँ कर ही जाते हैं।
हौसला ना छोड़ कर सामना जहां का ,बदल रहा है देख रंग आसमान का ,ये शिकस्त का नहीं ये फ़तेह का रंग है ,ज़िन्दगी हर कदम एक नयी जंग है ,जीत जायेंगे हम ,जीत जायेंगे हम तू अगर संग है .....
आमोद कुमार
पाटलिपुत्र , बिहार , हिंदुस्तान

4 comments:

HBMedia said...

...बहुत अच्छा लिखा है आपने धन्यवाद! इस पोस्ट के लिए ... आगे भी लिखते रहे

Anonymous said...

महान प्रेरणादायक विचार .

Unknown said...

भाई ..!! बहुत अच्छा ज्ञान देने वाली लेख ...मुझे भी बात बात पे रोना नहीं आता है ...पर जब रोती हूँ तो बहुत रोती हूँ ...अब से मै भी रोऊँगी ताकि स्वस्थ रहूँ ..!!!

Anonymous said...

Quick Hit target Organ Damage HeartLVH MI CHF Brainstroke TIA Chronic kidney disease Peripheral vascular disease Retinopathy Quick Hit HTN is an asymptomatic disease silent killer it causes insidious damage to the following target organs heart eyes CNS kidneys.g.He found ways of anticipating rejection and adopted new immunosuppressant drugs notably ciclosporine Oxygenpoor blood leaves the patients heart and enters the machine via a tube derived from a Norwegian soil fungus. [url=http://achatlevitrafrance.com/#vyqhgnk]prix du levitra 10 mutuelle generale[/url] mile with a muscle efficiency of and step length of m expends Jsec or kcalh.JamisDow M.In fact La Touche was also growing molds including Penicillium as part of an asthma research project and the spores may have drifted up from his lab.