Monday, April 26, 2010

हमेशा अपना सोंच सकारात्मक रखे !

आमतौर प़र क्रोध  और उदासी ईर्ष्या की यह भावना असुरक्षा, भय, नकारात्मक विचारों आदि के कारण उत्पन्न होती है। क्रोध और उदासी ईर्ष्या के मित्र हैं और इसके उत्पन्न होते ही इसके साथ आ जुड़ते हैं। ये क्रोध और उदासी फिर आदमी को भड़काने लगते हैं |
हमेशा अपना सोंच सकारात्मक रखे ! प्रभु ने सभी प्राणी को अपार उर्जा के साथ इस पृथ्वी प़र भेजा हैं , कुछ लोग हमेशा अपना सोंच नकारात्मक ही रखकर अपनी उर्जा को नष्ट करते हैं उन्हें यह नहीं भूलनी चाहिए कि इस से कुछ क्षण के लिए शान्ति मिलती हैं , और वे सदैव दुःख की ओर अग्रसर होते जाते हैं इससे उनको परेशानी होती हैं ना की किसी और को | परिणाम स्वरुप नकारात्मक सोंच रखने वाले व्यक्ति मानसिक रोग के शिकार बन जाते हैं .....
[कोई विश्वास करे या ना करे , हम इस बात क़ी फिक्र कभी नहीं करते हैं ] लेकिन पता नहीं क्यों हम हमेशा अपने आप में मगन रहते हैं , जहाँ जो भी अच्छा कार्य मिला उसको करने के बाद ही आराम करने क़ी सोंचते हैं और ऐसी नींद अच्छी नींद से सोते हैं क़ी पुछिये मत |
हमारे आस पास कुछ महापुरुष भी रहते हैं , जिन्हें हम प़र खूब गुस्सा रहता हैं , लेकिन मैं सच कह रहा हूँ , मुझे कोई गुस्सा उनपर नहीं रहता हैं , क्योंकि यह मुझे मालूम हैं क़ी पूर्व में भी कुछ व्यक्ति राक्षस (निर्दय मनुष्य) होते थे और कुछ व्यक्ति देवता स्वरुप ...... आज भी हम सब में जिनका सोंच अच्छा हैं , उन्हें देवता कहा जाता हैं और जिनकी सोंच बुडी हैं उन्हें राक्षस |
राक्षसों क़ी कहानी में दोस्तों उन्हें बड़ी बड़ी सिंघ लगाया के दर्शाया जाता रहा हैं ताकि हम सब उस किताब को ध्यान से पढ़े , लेकिन वास्तव में ऐसी कोई भी सिंघ राक्षसों में नहीं लगा रहता हैं , वह भी आम मनुष्य के तरह होते हैं , सिर्फ फर्क इतना रहता हैं कि वे अपनी निर्दयिता से लोगो को तंग और परेशान करते हैं , और हमेशा अच्छे व्यक्ति राक्षसों के व्यभार से परेशान होते रहते हैं , लेकिन अंततः विजय अच्छे लोग ही होते हैं और राक्षसों कि पराजय होती हैं |


इस लिए अच्छे कार्यो को करते रहना हैं , अपना सोंच सकारात्मक रखना हैं , गलत कार्य की ओर कभी ध्यान देने की भी आवश्यकता नहीं हैं , और फिर देखिये आप हमेशा आनंदित रहेंगे |
अपने आप को हमेशा कोई ना कोई काम में व्यस्त रखे , अगर कोई कार्य नहीं मिले तो अच्छी अच्छी किताबे पढना शुरू कर दे जब भी समय मिले कबीरदास जी की वाणी को पढ़े या किसी से पूछे वाणी की मधुरता ऐसी लाये की राक्षसगण भी खुश हो जाये ... मीठी वाणी बोलिए |
हम अच्छी अच्छी गाना सुन कर अकेले में झूम उठते हैं , लेकिन लोगो की बीच में जाकर खामोश हो जाते हैं , क्योंकि हमारी मजबूरी हैं , लोग तुरंत फुहर कहना शुरू कर देंगे ,,,,, लेकिन हम तो झूमते हैं गाना के बोल प़र , किसी संगीतकार के तर्ज प़र और लोग व्यर्थ में अर्थ का अनर्थ निकलना शुरू कर देंगे ..........क़ि  अरे देखो इस लड़का को कही ना कहीं जरूर इसको किसी लड़की से प्यार हो गया हैं , तभी यह गाना सुन भी रहा और साथ साथ गा भी रहा हैं ................ ....
[प्रेम की गाली में इक छोटा सा घर बनायेंगे,

कलियाँ ना मिले ना सही, काँटो से सजायेंगे ,
बगिया से सुन्दर वो बन होगा ,
रिमझिम बरसता सावन होगा ,
झिलमिल सितारों का आँगन होगा ...........................]
लेकिन हमको कौन गाना का लाइन प्रेरित करता वह सुनिए """""""कलियाँ ना मिले ना सही, काँटो से सजायेंगे """""""""

मेरा साफ़ मतलब रहता हैं क़ि यार छोड़ो .......हमको काँटो प़र भी चलना पड़े तो भी चलेंगे, लेकिन राक्षसबा सबसे के तरफ ध्यान भी नहीं देंगे उनका मुकाबला करेंगे , वह भी डटकर एवं अच्छे व्यक्तियों को सम्मानित करेंगे, और जीवन को सुद्ध , सरल बनाकर , अपने अच्छे लक्ष्य को प्राप्त करेंगे
मेरा भी सभी लोग से निवेदन होगा क़ि आप भी कुछ इस तरह का अच्छा प्रयास करे , तभी अच्छी अच्छी बाते बनेंगी , यह कहकर पल्ला मत झारे क़ि हम एक अकेला क्या करेंगे .......लेकिन यह मत भूलिए क़ि 1 से ही अनेको कारवा बने  है , पांडव पाँच भाई ने ही मिलकर कौरवो क़ी सेना को पराजित किया था !
||||मेरी यह कहानी कहाँ से शुरू हुई , कहाँ ख़त्म हुई जरूर आपको अटपटा सा जरूर लग रहा होगा .........लेकिन आप लोग समझने का प्रयास करे |||||||
जय हिंद
आमोद कुमार

पाटलिपुत्र , बिहार , हिंदुस्तान

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