Friday, April 23, 2010

घमंड ईश्वर का सबसे प्यारा भोजन हैं |

   !!!!!सत्य पराजित नहीं हो सकता है ! परेशान हो सकता है !!!!!
जीवन में हमेशा कुछ ना कुछ रचनात्मक कार्य करते रहे , हमेशा खुश रहने का प्रयास करे , अपने अंदर कभी घमंड नहीं उत्पन होने दे , क्योकि यह ईश्वर का सबसे प्यारा भोजन हैं , प्यार करना हैं तो अपने वतन से करे, जहाँ क़ी रोटी हम खाते हैं .

शांत और ज्ञानी व्यक्ति को हमेशा शान्ति पूर्वक देखे , कभी उन्हें अशांत करने का प्रयास ना कर.. , इसी में हम सब क़ी भलाई हैं
शांत और ज्ञानी व्यक्ति ईश्वर के समान हैं , लेकिन ईश्वर का दूसरा स्वरुप भी होता हैं , इस बात को भी कभी नजर अंदाज ना करे .....
आपके जीवन की कमान भी और की तरह ईश्वर के हाथ में है। आप स्वयं न तो जी सकते हैं और न ही मर सकते हैं। फिर किस बात का घमंड? ईश्वर की सत्ता को ललकारने का कैसा साहस?
प्रेम सबसे महान उपहार है जो न ढींग मारता, न घमंड करता है, वास्तव में यह सत्य और दूसरों के सदाचरण से प्रसन्न होता है। जो व्यक्ति वास्तव में प्रेम करता है वह अपना स्वार्थ नहीं खोजता और न बुराई का लेखा रखता है। वह सहनशील होता है, सब कुछ पर विश्वास करता है, सब कुछ की आशा करता है और सब कुछ सह लेता है। अंत में जब हम ईश्वर को आमने सामने देखेंगे बाकी सब वरदान नहीं दिखाई देंगे, जो केवल अनन्तकाल तक रहेगा वह प्रेम ही है। क्योंकि ईश्वर प्रेम है और हम सब उनके साथ पूर्ण एकात्मता में उनके सदृश बन जाएंगे।
        !!!!!सत्य  परेशान हो सकता है, सत्य पराजित नहीं हो सकता है !!!!!!
कला ईश्वर की दी हुई दौलत हैं !
रात को सोते समय ईश्वर ही हमारे शरीर का नियंत्रण करता है। हमें स्वयं पर घमंड नहीं करना चाहिए और जैसे व्यवहार की अपेक्षा हम अपने लिए दूसरों से रखते है, वैसा ही दूसरों के साथ भी करना चाहिए। विद्या बांटने से बढ़ती है, इसलिए हमें इसका सर्वाधिक दान करना चाहिए।
ईश्वर बिना भक्ति के और भक्ति बिना भगवान की कृपा के प्राप्त नहीं होती।
!!!!!सत्य पराजित नहीं हो सकता है ! परेशान हो सकता है !!!!!
संसार में ईश्वर कभी भी कोई अनिष्ट नहीं करता उसके द्वारा दिए गए दुःख और दर्द में भी कही न कही सुख के आसार होते है जिसको फलित होते हम देख नहीं पाते.

जो व्यक्ति दूसरों की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता है, भगवान भी उसकी सहायता करते हैं. सबकी सहायता करने का सीधा मतलब है अपनी सहायता क्योंकि जब हम जरूरतमंदों की सहायता सच्चे मन से करते हैं तो हमें दिली ख़ुशी मिलती है. सहायता का अर्थ ये नहीं है कि हम रुपये पैसे या कपडे लत्ते लुटा दें , बल्कि सहायता में वो मदद भी शामिल है जो शरीर से की जा सकती हो. किसी घायल को अस्पताल पहुँचाना , किसी नेत्रहीन को अपनी मंजिल तक पहुँचाना , जरुरत पड़ने पर रक्तदान करना, भूख – प्यास से तड़फते व्यक्ति को भोजन पानी देने जैसे कार्यों से जो तसल्ली मन को मिलती है वो और किसी काम से कभी हासिल नहीं हो सकती. आत्मप्रेरणा एवं निःस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद के लिए किये गए सभी कार्य किसी न किसी रूप मै हमारे जीवन के लिए शुभ फलदायी होते हैं और हमारे व्यक्तित्व को महान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं |
आमोद कुमार

पाटलिपुत्र , बिहार , हिंदुस्तान

2 comments:

Anonymous said...

बहुत सुन्दर आमोद जी.. आगे भी ऐसा प्रेरणादायक लेख लिखते रहिये..

Unknown said...

भाई आमोद बिलकुल सही बोले सत्य पराजित नहीं हो सकता है ! परेशान हो सकता है !!!!! आज के युग में भी भगवान स्वरूप इन्सान है जिन्हें आप भी जानते है और मै भी अब उनसे अलग भगवान की सूरत क्या होगा ...!!! बहुत बढ़िया लेख...!!!!