Sunday, March 8, 2009

जितना है हमको !!!!!!!

न्यायोचित अधिकार मांगने से न मिले , तो लड़ के
तेजस्वी छिनते समर को जीत ,या ख़ुद मरके !

छमा , दया , तप , त्याग मनोबल, सबका लिया सहारा ;
पर नर व्यग्रह सुयोधन तुमसे कहो , कहा कब हारा ?

छमा शोभती उस भुजंग को , जिसके पास गरल हो !
उसको क्या, जो दंतहीन, विषरहित , विनीत, सरल हो !