सारा कश्मीर हमारा है ......... ..........
हमने समझा दोस्त उन्हें ,वे दुश्मन हमें समझते है ,
नहीं फिक्र है उन्हें अमन की , बारम्बार उलझते है |
नहीं याद है उन्हें इख्तर , का वह अमर युद्ध - सन्देश ,
जो हमसे टकराएगा हमसे , हो जायेगा वह खंडित देश |
विश्व शांति अब रहे सुरझित , यही सोचकर हम सबने ,
सयम से संघर्ष किया है , बलि दी है कितनी जाने |
न लो परीझा अब वर्ना , इच्छा सुन लो यह जन जन की,
मिट जायेगी वह रेखा, जो वर्षो पूर्व बिभाजन की ।
कारगिल से गिलगित तक,
सारा कश्मीर हमारा है .......सारा मुंबई हमारा है.... सारा भारतवर्ष हमारा है ......सारा बिहार हमारा है .......
इस कविता के लेखक , आदरणीय श्री अरविंद पांडेय जी , [I.P.S], को बहुत बहुत धन्यवाद !!!!!!
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