Sunday, March 1, 2009

आमोद कुमार

बुझी हुई समां जल सकती है ,
तूफ़ान के हद से किस्ती निकल सकती है ,
मायूस न हो इरादे न बदल ,
तक़दीर कभी भी बदल सकती है ।
आमोद कुमार

2 comments:

KUMAR JAINENDRA said...

hi,
jainendra

Er. AMOD KUMAR said...

PLEASE DON'T WRITE HI HELLO ON MY BLOCK