Tuesday, March 9, 2010

जय हो मेरे भोलेनाथ.... जय हो श्री माँ दुर्गा सप्तशती...

जय हो मेरे भोलेनाथ.... जय हो श्री माँ दुर्गा सप्तशती...


जब श्री माँ दुर्गा सप्तशती ने यज्ञ में पिता प्रजापति के अपमान से अपने को अग्नि कुंड में समर्पित कर दी थी , भगवान शंकर ने अपने को अपमानित देखकर अपने ससुर के यहाँ पहुचे और तुरंत माँ सप्तशती का शव उठाकर तांडव करने लगे , और पूरा ब्रह्माण्ड हिलने लगा , यह देख भगवान श्री विष्णु घबरा गए और सोंच में पर गए की श्री शंकर भोलेनाथ को शांत नहीं किया गया तब तो इस सृष्टी का ही विनाष हो जायेगा , तब भगवान श्री विष्णु ने अपने चक्र से माँ सप्तशती के शव को टुक्रे टुक्रे में विभक्त कर दिया क्योंकि जब तक माँ सप्तशती का शव नहीं हटता भोलेनाथ शांत नहीं होते , माँ सप्तशती का टुकरा जहाँ जहाँ गिरा उन्हें माँ शक्तिपीठ के नाम से जाना गया , वोही जय माँ श्री श्री माँ विंध्यवासिनी है , वोही माँ पटनदेवी है , वोही माँ छिनमस्तिका हैं , वोही माँ वैष्णो देवी हैं , वोही माँ चामुंडी हैं , वोही माँ बंगलामुखी हैं और भी कई माँ हैं जो भी, मुझे याद नहीं आ रही है ,

हम सही हैं क़ि गलत इस पर मुझे ज्ञान देने क़ि कृपा क़ि जाये
...आमोद

2 comments:

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