आज होली है , अपने मन क़ी बात लिखकर खेलूँगा होली !!!!!!!
मुझे शुरू से स्वंतंत्र रूप से जीने क़ी इच्छा थी लेकिन समय का नियति का ऐसा चक्र चला क़ी हमेशा गुलाम के तरह जीना परा ,
मेरे पिता का सरकारी आवास 7 No. Harding road था , वहां हम भी रहते थे , हमेशा लोफरो क़ी तरह motorcycle ya कोई भी घर क़ी गाड़ी से घूमा करता था , बचपन से ही नया करने क़ी हमेशा नया कुछ करने का जनून सवार रहता था , कोई भी जान पहचान का व्यक्ति आते थे हमारे यहाँ तो चुपके से उनकी गाड़ी स्टार्ट करके खूब चलते थे , उसके बाद घर में माँ पर्दा के डंडा से अच्छा पिटाई मेरा करती थी , फिर भी मैं नहीं मानता था , मैं नौवी वर्ग का छात्र था था तब स्वर्गीय श्री कर्पूरी ठाकुर , अपने पिता , श्री लालू प्रसाद यादव , श्री राम जीवन सिंह और भी कई लोग को लेकर बेतिया उप चुनाव में अपने पिता क़ी जीप गारी चलाकर इनलोगों को बैठा कर ड्राईवर बन कर जाता था क्योंकि इन लोगो के पास हमेशा ड्राईवर का अवाभ रहता था ,
श्री लालू प्रसाद , श्री जाबिर हुसैन , श्री रंजन यादव ,श्री वृषण पटेल , श्री शरद यादव , श्री श्रीनारायण यादव , श्री जय प्रकाश यादव , और भी बहुत सारे लोग जहाँ भी हमको गारी चलाते कही जाते देख लेते थे , वहां पर तुरंत रुकवा कर बैठ जाते थे और जहाँ जहाँ जाना रहता था वहां वे लोग जाते थे , हम भी ख़ुशी ख़ुशी उनलोगों को घुमाते थे .
घर अगर ५ बजे के बाद पहुँचते थे तो फिर माँ अपना चमत्कार पर्दा के डंडा से दिखाती थी , लेकिन हम भी एक दम विशुद्ध रूप से थेथर थे कोई फर्क नहीं परता था , मार खाकर बहुत ही ख़ुशी पूर्वक सो जाते थे , अगर मेरे पिता जी को पता चलता था तो बहुत ही माँ को खूब डांट पिलाते थे , और मुझे बरी ख़ुशी उस समय होती थी !
मेरी माँ ज्यादा से ज्यादा ५ रुपया देती थी , लेकिन हम इतना बड़ा चोर थे क़ी पूछिए मत जैसे ही माँ खाना बनाने जाती थी अगर गलती से गोदरेज का चाभी छुट जाता था मै तुरंत उसमे से पैसा चुरा लिया करता था माँ को पता भी नहीं चलता था , मेरा यह सिलसिला आज भी जारी रहता है फर्क सिर्फ इतना है क़ी माँ आज पिटती नहीं है , सिर्फ इतना बोलकर चुप हो जाती हैं क़ी इतना बड़ा हो गये हो और शर्म भी नहीं आती है और मैं हमेशा यह बोलकर निकल जाऊंगा क़ी माँ तुमसे कैसा शर्म हैं तुम को तो अपने बेटा पर गौरव करना चाहिए क़ी जो किसी का भी कितना भी धन रहता है उसको छुना पाप समझता है और तुम्हारा पैसा खा के मुझे पूर्ण संतुष्टि मिलती है .
देखिये अब मुझे नींद आ रही मैं वह कोई बात नहीं लिखा हूँ जिसके लिए मैंने लिखना शुरू किया है , मैं अपनी इस कहानी को आगे जारी रखूंगा जब फिर समय मिलेगा तबतक के लिए ....... ब्रेक
.............आमोद कुमार
7 comments:
आपको तथा आपके परिवार को होली की शुभकामनाएँ.nice
आमोद जी . बहुत सुन्दर लिखा आपने ..आपकी आत्मा में विराजमान लेखक इतने दिनी बाद जाग उठा है..निरंतर लेखन जारी रखिये..कोई विलक्षण साहित्यिक कृति जन्म लेने वाली है आपसे ..
वो हो, इसे पढ़कर तो मुझे मेरा बचपन याद आ गया। धन्यवाद, लेखन में मौलिकता है। अगली कड़ी के इंतजार में हैं........
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