मेरे परम आदरणीय
मेरे अंदर एक अदभुत प्यार का अभाश हुआ जिसको अभी भी समझ में नहीं आ रहा की कैसे लिखू बस जो भी लिख रहा हूँ वह दिल से लिख रहा हूँ कोई भी गलती हिंदी लिखने में हो तो माफ़ करंगे.
मेरे माता पिता की संछिप्त परिचय
१. मेरे पिता की शैक्षिक योग्यता ====M.A & B.L== 5 बार विधायक एक बार कैबिनेट मंत्री बिहार सरकार ......
2. मेरे माता की शैक्षिक योग्यता====B.A, B.ed, M.A , M.ed, डॉक्टर राधिका सिन्हा , एक महिना पहले बिहार सरकार से सेवा समाप्त , पिछले ३० वर्ष से पटना के लगभग सभी उच्य विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर ( BY BPSC) , उस से पहले TEACHER थी वर्ष 1971 से , कुछ दिन तीन साल तक बीच में विधालय सेवा बोर्ड की सदस्य भी थी .......
१. मेरे पिता की शैक्षिक योग्यता ====M.A & B.L== 5 बार विधायक एक बार कैबिनेट मंत्री बिहार सरकार ......
2. मेरे माता की शैक्षिक योग्यता====B.A, B.ed, M.A , M.ed, डॉक्टर राधिका सिन्हा , एक महिना पहले बिहार सरकार से सेवा समाप्त , पिछले ३० वर्ष से पटना के लगभग सभी उच्य विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर ( BY BPSC) , उस से पहले TEACHER थी वर्ष 1971 से , कुछ दिन तीन साल तक बीच में विधालय सेवा बोर्ड की सदस्य भी थी .......
मेरे पापा हमको बहुत प्यार करते थे और आज भी करते है लेकिन पता नहीं क्या डर की भावना थी की मैं उनके सामने कुछ भी खुल के बोल नहीं सकता हूँ यहाँ तक की अगर हम कही बैठ के खाना खा रहे तो उनको देखते के साथ मैं खाना का थाली उठाकर दूसरा रूम में जाकर खाने चला जायूँगा , पता नहीं यह क्यों हुआ हमेशा खुल के पापा के सामने कुछ भी नहीं कर पाया और अंदर अंदर प्यार पाने के लिए तरसते रहा , मैं अपने जीवन में डरा तो सिर्फ अपने पापा के सामने में और कभी कोई बात का खुल कर जबाब भी नहीं दे पाया , दूसरी तरफ दुनिया का शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसके सामने मैं जो मन में में आया फटाक से जबाब नहीं दिया , मैं हमेशा अपने बेबाक टिपण्णी करने के लिए जाना जाता रहा हूँ , मेरे पापा का बहुत मन था की मैं हमेशा नौकरी करते रहूँ , लेकिन मैं बचपन से ही राजनीति करने के लिए बेचैन रहता था संयोग ऐसा हुआ की हमेशा उल्टा मेरे साथ होते आया , मेरे पापा ने कहा की तुमको सिर्फ एक दो महिना नौकरी करना है इस लिए जायो , मैं माँ के सामने जाकर बोला तो माँ ने भी मेरा साथ नहीं दिया उसने भी पापा का साथ दिया , मजबूरन मुझे टाटा स्टील में एक पढाधिकारी के रूप में नौकरी शुरू की , हमारे कार्य से प्रसन होकर मुझे तुरंत वरीय पढाधिकारी बना दिया गिया , मैंने माँ से दो महिना बाद बोला की माँ दो महिना पूरा हो गया अब हम नौकरी नहीं करेंगे , माँ बोली नहीं अभी तुमको और कुछ दिन नौकरी करना है उसके बाद मैं फिर नौकरी करने चला गया कुछ समय बाद मैं टाटा स्टील में में प्रबंधक में प्रोनिती दे दी गयी
एक दिन मैं कंपनी के काम से टाटा स्टील के विमान से पटना पंहुचा संयोग से उस समय मेरे पापा बिहार सरकार में मंत्री थे और उसी समय वे बिहार सरकार के विमान से सहरसा से आ रहे थे , उसके बाद उन्होंने मेरी माँ को बताया की आमोद अब हमेशा नौकरी करेगा देखो कितना बड़ा आदमी बन गया अपना बेटा , जैसे ही यह बात मेरे कानो में परी मै रोते रोते बेहाल हो गया , बोला हे ईश्वर अपने ये क्या कर दिया !
Note: उसके बाद की कहानी को मैं रोकूंगा क्योंकि मेरी कहानी लम्बी होती जा रही और मैं मूल बात पर नहीं पहुँच पा रहा हूँ, ..........अगला पंक्ति जारी रहेगा ]
आमोद कुमार
4 comments:
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