Thursday, June 17, 2010

जीवन में अगर कुछ अच्छा कर दिखाना हैं तो हमेशा अपने प्रियजनों के साथ अच्छा व्यवहार करें.....


अगर मगर कुछ नहीं .....जीवन में अगर कुछ अच्छा कर दिखाना हैं तो हमेशा अपने प्रियजनों के साथ अच्छा व्यवहार करें...बहुत ही साधारण सी बात हैं ...जीवन्मुक्त पुरुष सबमें होते हुए, सब करते हुए भी सुखपूर्वक जीते हैं, सुखपूर्वक खाते पीते हैं, सुखपूर्वक आते जाते हैं, सुखपूर्वक स्वस्वरुप में समाते हैं ।क्षुद्र भावनाओं की चपेट में आकर समाज टूटता है…झूठ की जय जयकार होती है और सच अपना  मुहं  छिपाकर रोता है। अगर किसी बात की चिंता सता रही हैं तो किसी दोस्त की कोई परेशानी हल करने में मदद करें। आपकी चिंताएं खुद ही खत्म हो जाएंगी.......आज आधुनिकीकरण और आकांक्षाओं की अंधी उडान ने हमशे आपसे परिवार भी छीन लिए हैं।हमें ख्याल रखना हैं उनका ......
अपने विद्वान पूर्वजों ने भी भी चेतावनी दी है कि जिस प्रकार जंगल में हवा के प्रकोप से एक ही वृक्ष की शाखाएं आपस में रगड़ कर अग्नि पैदा करती है और उसमें वो वृक्ष ही नही वरन पूरा वन ही जलकर भस्म हो जाता है। उसी प्रकार घर  भी आपसी कलहाग्नि और द्वेषाग्नि से भस्म हो जाता है। जहां आपसी कलह है वहां शक्ति का क्षय अवश्यभामी है। घर तो घर होता वहां गुस्सा नहीं करना हैं ....सभी को प्यार करते हुए  प्यार से आगे बढ़ते जाना हैं .......

कबीर के दोहों में जो मिठास और सच्चाई है शायद और किसी में हो ......
ऐसी वाणी बोलिये, मन का आपा खोये,
औरों को शीतल करे, आपहुँ शीतल होये।
बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर
पंथी को छाया नही, फल लगे अति दूर।
कबीरा खड़ा बाजार में मांगे सब की खैर
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर!.........यहाँ प़र कबीर दास जी की पंक्ति को मैं अलग अंदाज़ मैं पढता हूँ ........दोस्ती सभी अच्छे

लोग के साथ करना हैं ....और सभी ख़राब लोगो से दूर रहना हैं .....
बुरा जो देखन में चला, बुरा ना मिलया कोई
जो मन खोजा आपना, मुझ से बुरा ना कोई। 
दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करे ना कोये
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे को होये।
चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोए
दो पाटन के बीच में, साबुत बचा ना कोए।
कबीरा ते नर अँध है, गुरु को कहते और ।
हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर ॥
मैं हमेशा कहता हूँ कि  तकदीर हैं क्या , मैं क्या जानू ? मैं मालिक अपनी किस्मत का, मैं बंदा अपनी,....... अपनी हिम्मत का ..............
पुराना इतिहास खत्म नहीं हो जाता हैं , लेकिन नया इतिहास तो हमेशा बनता ही हैं ना.........
Unforgettable Dialogues
"जिसने हर रोज अपनी माँ को थोड़ा थोड़ा मरते देखा हो , उसे मौत से डर नहीं लगता ." - Trishul
"आपने जेल की दीवारों और जंजीरों का लोहा देखा है जेलर साहब , कालिया की हिम्मत का फौलाद नहीं देखा हैं ." -Kaalia
"जो मर्द होता है, उसे दर्द नहीं होता ." -Mard
"रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप होते हैं , नाम है शहेंशाह ." -Shahenshah
"सही बात सही वक़्त पे किया जाये तो उसका मज़ा ही कुछ और है , और मैं सही वक़्त का इंतज़ार करता हूँ ." -Trishul
......आमोद कुमार, पाटलिपुत्र , बिहार , हिंदुस्तान

4 comments:

S.M.Masoom said...

विद्वान पूर्वजों ने भी भी चेतावनी दी है कि जिस प्रकार जंगल में हवा के प्रकोप से एक ही वृक्ष की शाखाएं आपस में रगड़ कर अग्नि पैदा करती है और उसमें वो वृक्ष ही नही वरन पूरा वन ही जलकर भस्म हो जाता है। उसी प्रकार घर भी आपसी कलहाग्नि और द्वेषाग्नि से भस्म हो जाता है।
पसंद आया आप का पैगाम. ठीक इसी प्रकार अगेर वृक्ष की एक शाख सूख रही हो तोह दूसरी सहारा दे सके तोह यह वृक्ष रूपी घर हमेशा हरा भरा रहेगा. आमोद कुमार जी आपको विचार बहुत ऊंचे हैं.

Er. AMOD KUMAR said...

THANKS

Er. AMOD KUMAR said...

मज़हब नहीं सिखाता
आपस में बैर रखना
हिंदी हैं हम वतन है
हिंदुस्तान हमारा।

वसुन्धरा पाण्डेय said...

hmmmmmmmmm kaliya ka tevar nahiidekha.....