Wednesday, June 16, 2010

मैं मालिक अपनी किस्मत का, मैं बंदा अपनी अपनी हिम्मत का ..............

मैं तो हमेशा सच बोलता हूँ. अब अगर लोग मेरी बातों को झूठ  समझ लेते हैं तो इसमें मेरे जैसे बंदे का क्या कसूर हैं ? -------------मैं तो मालिक हूँ अपनी किस्मत का, मैं तो बंदा हूँ अपनी अपनी हिम्मत का ..............लोग कहते हैं कि सिकन्दर सारी दुनिया का मालिक था, लेकिन हमें सिकन्दर बनने का कोई शौक नहीं हैं लेकिन अपने आत्मा का मालिक तो हमेशा बना रहूँगा , इसकी आज़ादी तो मुझे हैं ही .....लोगो प़र अत्याचार करके सिकन्दर बनने से अच्छा हैं कि कही जहर खा कर जान दे दे .....इस धरती माँ का बोझ तो कमसे कम ना बने ....
सिकन्दर तो छुछुंदर था जिसने अपने जुर्म से इतिहास के हरेक पन्ना में नाम लिख दिया , जो प्यार से इस दुनियाँ को चलायेगा वह व्यक्ति ही बनेगा असली शहंशाह !!!!!
मैं थोडा दुखित और खिन्नित अवश्य हूँ …पर क्रोधित नहीं हूँ…. अपनी हिम्मत अंतिम दम तक बनाये रखूंगा !विधिवत रूप से जब कोई कार्य नहीं हो पता हैं तो थोडा परेशानी तो होती ही हैं ना |
यदि किसी को हमसे समस्या है तो ये उनकी समस्या है …हमें किसी से कोई समस्या नहीं है और रहेगा भी नहीं , हम तो सभी लोगो से अच्छे की ही कामना करते हैं !
किसी की भी स्थिति अगर विकट है तो हिम्मत से काम ले ना की समस्या में उलझे रह कर एक  नया समस्या खड़ा करे , सब समस्या का निदान होता हैं शान्ति और प्रेम से साथ में अगर हिम्मत रहे तो तुरंत  समाधान मिल जाता हैं |
......आमोद कुमार, पाटलिपुत्र , बिहार , हिंदुस्तान

4 comments:

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