आत्मा की संतुष्टि, शारीरिक स्वस्थता व बुद्धि की स्थिरता चाहते हैं तो हमेशा हँसते-खिलखिलाते रहे .हँसना एक मानवीय लक्षण है, सृष्टि का कोई भी जीवधारी नहीं हँसता लेकिन एक हम मनुष्य ही हँसने वाले प्राणी हैं, जीवन में निरोगी रहने के लिए हमेशा मुस्कुराते रहना चाहिए। खाना खाते समय मुस्कुराइए, आपको महसूस होगा कि खाना अब अधिक स्वादिष्ट लग रहा है।
अपने में जिंदादिली एवं खुशमिजाजी बनाये रखने के लिये हमेशा हँसते रहने का प्रयास करे ..निराशा और चिंता का अचूक इलाज हैं हँसना ..जो व्यक्ति सुख और दुःख दोनों में हँसते रहता हैं वह व्यक्ति ही हैं सबसे बड़ा खिलाड़ी..रोते हुए तो सब आते हैं यह कटु सत्य हैं ...लेकिन जो हँसते हँसाते जीवन काटते हैं ..वही हैं सच्चे संत .....
कभी कभी हरेक इंसान के लिये परिस्थिति ऐसा बनती हैं की आदमी को ना चाहते हुए भी रोना पड़ जाता हैं शायद नियति का प्रभाव हो , लेकिन बहादुर की तरह आँख से आँसू पोछकर हँसते हुए अच्छे कर्मो के लिये निकल जाना हैं .....लेकिन जो नियति रुलाएगा वह एक दिन हँसने का भी दिन जरूर लायेगा |
जब भी किसी के लिए कुछ भी सोंचो अच्छा सोंचो, अगर सोंच अच्छी रहेगी तो दिल को भी ख़ुशी मिलेगी, दिल को खुशी मिलेगी तो होठो पे मुस्कुराहट आ ही जाएगी, हँसी और खुशी तो जहाँ भी चाहो मिल सकती हे, उसे ढूँढने नही जाना पड़ता, कभी कुछ पल के लिए हम मायूस हो गये और कुछ अच्छा ना लगे तब भी अगर आप कोई ऐसा पल याद कर ले जो आप की ज़िंदगी का सबसे हसीन पल हो तो मायूसी धीरे धीरे से अपने आप ही दूर हो जाएगी.
हँसते हुए जो समय आप व्यतीत करते हैं, वह ईश्वर के साथ व्यतीत किया समय है।अच्छे मित्रों को पाना कठिन , वियोग कष्टकारी और भूलना असम्भव होता है।इस लिये गुस्सा नहीं होना हैं ...
हर व्यक्ति में प्रतिभा होती है. दरअसल उस प्रतिभा को निखारने के लिए गहरे
अंधेरे रास्ते में जाने का साहस कम लोगों में ही होता है.
कमाले बुजदिली है , पस्त होना अपनी आँखों में ।
अगर थोडी सी हिम्मत हो तो क्या हो सकता नहीं ॥
अपने को संकट में डाल कर कार्य संपन्न करने वालों की विजय होती है। कायरों की नहीं।
गलती करने में कोई गलती नहीं है ।लेकिन गलती करने से डरना सबसे बडी गलती है, गलती करने का सीधा सा मतलब है कि आप तेजी से सीख रहे हैं , बड़ी गलतियाँ किये बिना कोई बडा आदमी नहीं बन सकता ,शायद इन्ही कारणों से मैं आगे अभी तक नहीं निकल पाया हूँ .......
दुनिया में सुख एवं दुःख दोनों ही धूप-छाँव की भाँति आते-जाते हैं यदि मनुष्य दोनों परिस्थितियों में हँसमुख रहे तो उसका मन सदैव काबू में रहता है व वह चिंता से बचा रह सकता है। आज के इस तनावपूर्ण वातावरण में व्यक्ति अपनी मुस्कुराहट व हँसी को भूलता जा रहा है,फलस्वरूप तनावजन्य बीमारियाँ जैसे- उच्च रक्तचाप, शुगर, माइग्रेन, हिस्टीरिया, पागलपन, डिप्रेशन आदि बहुत-सी बीमारियों को निमंत्रण दे रहा है।
अपने में जिंदादिली एवं खुशमिजाजी बनाये रखने के लिये हमेशा हँसते रहने का प्रयास करे ..निराशा और चिंता का अचूक इलाज हैं हँसना ..जो व्यक्ति सुख और दुःख दोनों में हँसते रहता हैं वह व्यक्ति ही हैं सबसे बड़ा खिलाड़ी..रोते हुए तो सब आते हैं यह कटु सत्य हैं ...लेकिन जो हँसते हँसाते जीवन काटते हैं ..वही हैं सच्चे संत .....
कभी कभी हरेक इंसान के लिये परिस्थिति ऐसा बनती हैं की आदमी को ना चाहते हुए भी रोना पड़ जाता हैं शायद नियति का प्रभाव हो , लेकिन बहादुर की तरह आँख से आँसू पोछकर हँसते हुए अच्छे कर्मो के लिये निकल जाना हैं .....लेकिन जो नियति रुलाएगा वह एक दिन हँसने का भी दिन जरूर लायेगा |
जब भी किसी के लिए कुछ भी सोंचो अच्छा सोंचो, अगर सोंच अच्छी रहेगी तो दिल को भी ख़ुशी मिलेगी, दिल को खुशी मिलेगी तो होठो पे मुस्कुराहट आ ही जाएगी, हँसी और खुशी तो जहाँ भी चाहो मिल सकती हे, उसे ढूँढने नही जाना पड़ता, कभी कुछ पल के लिए हम मायूस हो गये और कुछ अच्छा ना लगे तब भी अगर आप कोई ऐसा पल याद कर ले जो आप की ज़िंदगी का सबसे हसीन पल हो तो मायूसी धीरे धीरे से अपने आप ही दूर हो जाएगी.
हँसते हुए जो समय आप व्यतीत करते हैं, वह ईश्वर के साथ व्यतीत किया समय है।अच्छे मित्रों को पाना कठिन , वियोग कष्टकारी और भूलना असम्भव होता है।इस लिये गुस्सा नहीं होना हैं ...
हर व्यक्ति में प्रतिभा होती है. दरअसल उस प्रतिभा को निखारने के लिए गहरे
अंधेरे रास्ते में जाने का साहस कम लोगों में ही होता है.
कमाले बुजदिली है , पस्त होना अपनी आँखों में ।
अगर थोडी सी हिम्मत हो तो क्या हो सकता नहीं ॥
अपने को संकट में डाल कर कार्य संपन्न करने वालों की विजय होती है। कायरों की नहीं।
गलती करने में कोई गलती नहीं है ।लेकिन गलती करने से डरना सबसे बडी गलती है, गलती करने का सीधा सा मतलब है कि आप तेजी से सीख रहे हैं , बड़ी गलतियाँ किये बिना कोई बडा आदमी नहीं बन सकता ,शायद इन्ही कारणों से मैं आगे अभी तक नहीं निकल पाया हूँ .......
दुनिया में सुख एवं दुःख दोनों ही धूप-छाँव की भाँति आते-जाते हैं यदि मनुष्य दोनों परिस्थितियों में हँसमुख रहे तो उसका मन सदैव काबू में रहता है व वह चिंता से बचा रह सकता है। आज के इस तनावपूर्ण वातावरण में व्यक्ति अपनी मुस्कुराहट व हँसी को भूलता जा रहा है,फलस्वरूप तनावजन्य बीमारियाँ जैसे- उच्च रक्तचाप, शुगर, माइग्रेन, हिस्टीरिया, पागलपन, डिप्रेशन आदि बहुत-सी बीमारियों को निमंत्रण दे रहा है।
अंत में कहूँगा की अपनी गलती स्वीकार कर लेने में लज्जा की कोई बात नहीं है । इससे दूसरे शब्दों में यही प्रमाणित होता है कि कल की अपेक्षा आज आप अधिक समझदार हैं , और खुश रहिये ....हँसते हँसते ......ये जीवन हैं ....क्योंकि असफलता आपको महान कार्यों के लिये तैयार करने की प्रकृति की योजना है ......
......आमोद कुमार, पाटलिपुत्र , बिहार , हिंदुस्तान
4 comments:
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